हर्निया(Hernia) क्या होता है? कारण, लक्षण और इलाज की पूरी जानकारी

अक्सर लोग पेट या शरीर के किसी हिस्से में हल्का सा उभार या सूजन दिखने पर उसे छोटी समस्या समझकर ध्यान नहीं देते। लेकिन कई बार यही उभार हर्निया की शुरुआत हो सकता है। शुरू में इसमें ज्यादा दर्द नहीं होता, इसलिए लोग इसे गंभीर नहीं मानते। समय के साथ यह परेशानी बढ़ सकती है और उठने-बैठने या रोज़ के काम करने में दिक्कत होने लगती है। अगर समय रहते सही जानकारी और इलाज न किया जाए, तो हर्निया से जुड़ी समस्याएं और ज्यादा बढ़ सकती हैं।
इस ब्लॉग में हर्निया से जुड़ी जरूरी बातें आसान और साफ शब्दों में समझाई गई हैं, ताकि लोग इसके शुरुआती लक्षण पहचान सकें और यह जान सकें कि कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है, ताकि वे समय पर इलाज करवा सकें और आगे होने वाली परेशानियों से बच सकें।
हर्निया क्या होता है?
हर्निया तब होता है जब शरीर की किसी जगह की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं और अंदर का कोई अंग या ऊतक उस कमजोर हिस्से से बाहर की ओर उभरने लगता है। यह उभार अक्सर धीरे-धीरे दिखाई देता है और पेट के बाउंड्री के मांसपेशी कमजोर होकर बाउंड्री में स्थित नेचुरल छेद को बड़ा होके छेद से पेट के अंदर के अंग या अंग का हिस्सा जैसे आंत से बाहर लटकना शुरुआत में ज्यादा परेशानी नहीं देता।
ज्यादातर मामलों में हर्निया पेट की मांसपेशियों की कमजोरी के कारण होता है, लेकिन यह जांघ, नाभि या पेट के ऊपरी हिस्से में भी हो सकता है। शुरू में इसमें दर्द नहीं होता या बहुत हल्का होता है, इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन समय के साथ यह समस्या बढ़ सकती है और दर्द या असहजता महसूस होने लगती है।
हर्निया क्या है और यह कैसे बनता है?
अगर सरल शब्दों में समझें, तो हर्निया क्या है यह शरीर की संरचना में आई कमजोरी का परिणाम है। जब पेट या शरीर के किसी हिस्से पर ज्यादा दबाव पड़ता है और मांसपेशियां उसे संभाल नहीं पातीं, तो अंदर का अंग बाहर की ओर निकल आता है।
यह दबाव अचानक भी हो सकता है और धीरे-धीरे भी बढ़ सकता है मांसपेशी के बीच से रास्ता बनाकर।
हर्निया होने के प्रमुख कारण
हर्निया होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। नीचे सबसे आम कारण दिए गए हैं:
- जन्म से मांसपेशियों की कमजोरी
- भारी वजन उठाना
- लगातार कब्ज की समस्या
- लंबे समय तक खांसी
- मोटापा
- गर्भावस्था
- पेट का घाव ठीक से पूर्ण रूप से ना जुड़ना या मांसपेशी जुड़े बिना सिर्फ छाला चमड़ी जुड़ना इनसीजनल हर्निया बनता है।
- बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों का कमजोर होना
इन कारणों से पेट या शरीर के अन्य हिस्सों पर दबाव बढ़ता है, जिससे हर्निया बनने की संभावना रहती है।
हर्निया के लक्षण
हर्निया के लक्षण व्यक्ति और उसके प्रकार पर निर्भर करते हैं। आमतौर पर दिखाई देने वाले लक्षण इस प्रकार हैं:
- पेट, जांघ या नाभि के पास सूजन जैसा दिखना
- खड़े होने या वजन उठाने पर उभार बढ़ना / लेटने पर
- हल्का या तेज दर्द / खिंचाव का महसूस होना
- पेट में भारीपन
- जलन या खिंचाव महसूस होना
- कुछ मामलों में समय में इलाज ना करने पर जटिल समस्या पर हर्निया से आंत लटक के पुल जाने से आंतों का रुकावट लगातार उल्टी, पेट फूल जाना, दर्द असहज होना। आंत का नीला या काला पड़ जाना। (सड़ जाना)
अगर उभार दर्द के साथ सख्त हो जाए या अंदर न जाए, तो यह गंभीर स्थिति हो सकती है।
हर्निया के प्रकार
हर प्रकार के हर्निया का इलाज अलग तरीके से किया जाता है। हर्निया की जांच कैसे की जाती है?डॉक्टर सबसे पहले शारीरिक जांच करते हैं। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर ये जांच की जाती हैं:
सही जांच से यह तय किया जाता है कि हर्निया कितना गंभीर है। हर्निया का इलाजहर्निया का इलाज उसकी गंभीरता और प्रकार पर निर्भर करता है। सभी मामलों में तुरंत सर्जरी जरूरी नहीं होती, लेकिन अधिकतर मामलों में सर्जरी ही हर्निया का एक मात्र इलाज है। 1. शुरुआती अवस्था मेंये प्रयास हर्निया जल्दी बड़ा होने से रोकते है। ऑपरेशन की सफलता या जाली के मजबूती को सहयोग करते हैं। 2. सर्जरी ही हर्निया का इलाज है।सर्जरी जब हर्निया बढ़ता है जाए, बुरा दिखने लगे हर्निया में आंत फंस जाए आंतों में रुकावट आ जाए। 3. सर्जरीजब हर्निया बढ़ने लगे या दर्द देने लगे, तो सर्जरी की सलाह दी जाती है। हर्निया सर्जरी के प्रकार
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